ghatshilaAugust 19, 2026
असीम मंडल के सरेंडर की जिम्मेदारी उस नक्सली को, जिस पर था 25 लाख का इनाम
पश्चिम मंडल का फाइल फोटो
By Newsroom
घाटशिला। एक करोड़ रुपये के इनामी और प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश, सचिन और उसके दस्ते के करीब पांच से छह सदस्यों के जल्द आत्मसमर्पण की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, आत्मसमर्पण झारखंड में होगा या पश्चिम बंगाल में, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल पुलिस ने असीम मंडल और उसके दस्ते को आत्मसमर्पण के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी पूर्व एरिया कमांडर रंजीत पाल उर्फ राहुल को दी है। राहुल कभी असीम मंडल के दस्ते का सक्रिय सदस्य रह चुका है। यही वजह है कि उसे आकाश की कार्यशैली, सोच और संभावित ठिकानों की अच्छी जानकारी है। साथ ही कोल्हान और त्रि-सीमावर्ती इलाके के जंगलों से भी वह परिचित है।
बताया जा रहा है कि राहुल पिछले दिनों गालूडीह थाना क्षेत्र के बेको इलाके में पहुंचा था और आसपास के जंगलों में असीम मंडल तथा उसके दस्ते से संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि, दोनों के बीच मुलाकात हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस घटनाक्रम के बाद झारखंड और पश्चिम बंगाल पुलिस की गतिविधियां तेज हो गई हैं।
25 लाख का इनामी था राहुल
रंजीत पाल उर्फ राहुल पर कभी झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। माओवादी संगठन के कद्दावर एरिया कमांडर कान्हू मुंडा और उसके दस्ते के सदस्यों के आत्मसमर्पण के बाद राहुल ने भी रणनीति बदली और पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया।
पश्चिम बंगाल की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत राहुल को आर्थिक सहायता के साथ होमगार्ड में नौकरी भी मिली। वर्तमान में वह मुख्यधारा में रहकर जीवन बिता रहा है।
बंगाल की सरेंडर पॉलिसी पर नक्सलियों की नजर
पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण और पुनर्वास की सुविधाओं के कारण कई माओवादी कैडर पहले भी हथियार डाल चुके हैं। इनमें ज्ञानेश्वरी ट्रेन हादसे का आरोपी जयंतो, लक्ष्मी महतो, कार्तिक उर्फ भीम सोरेन, विजय सिंह, समर तथा महिला नक्सली बेला और पुष्पा समेत अन्य नाम शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से असीम मंडल का दस्ता भी पश्चिम बंगाल की पुनर्वास नीति को लेकर आकर्षित बताया जा रहा है। दूसरी ओर, झारखंड पुलिस असीम मंडल को अपने राज्य में सरेंडर कराने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में दोनों राज्यों की पुलिस की नजर अब असीम मंडल और उसके दस्ते पर टिकी हुई है।
सरेंडर के बाद पुनर्वास नीति में अंतर
बताया जाता है कि झारखंड में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को इनामी राशि और पुनर्वास का लाभ मिलने के साथ कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। वहीं, पश्चिम बंगाल की नीति में आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने पर विशेष जोर दिया जाता है। इसी नीति के तहत कुछ सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सुरक्षित स्थान पर रखने और इच्छुक लोगों को होमगार्ड में नियुक्ति का विकल्प भी दिया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक करोड़ के इनामी असीम मंडल और उसके दस्ते का आत्मसमर्पण आखिर किस राज्य में होता है। फिलहाल दोनों राज्यों की पुलिस इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।


