ranchiJuly 28, 2026
विशेषज्ञों का सुझावः हेपेटाइटिस के प्रति रहें सतर्क, बीमारी गंभीर होने से पहले कराएं जांच
रांची में हेपेटाइटिस दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
By Newsroom

रांचीः इन दिनों झारखंड सहित देश के अन्य राज्यों में हेपेटाइटिस यानी लीवर का सूजन की समस्या आम हो गई है. यह वायरस, शराब का अत्यधिक सेवन, कुछ दवाओं, विषैले पदार्थों या ऑटोइम्यून रोगों के कारण हो सकता है.
इसके प्रमुख लक्षण हैं— पीलिया, थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट दर्द और गहरे रंग का मूत्र है. जिसका समय पर जांच और उपचार से गंभीर बीमारी होने से बचा जा सकता है. यह बातें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा आयोजित हेपेटाइटिस दिवस पर सामने आया है.
इस मौके पर हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन विषय पर आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने विचार रखे. रांची के निजी होटल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कमलेश कुमार, राज्य नोडल पदाधिकारी, वायरल हेपेटाइटिस प्रोग्राम, के स्वागत भाषण और मंचस्थ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ.
रांची सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने भी इस मौके पर संबोधित किया. इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 2017 से जून 2026 तक के राज्य में कुल 2,94,411 जांच हुए जिसमें हेपेटाइटिस बी (एचबीवी) की पॉजिटिविटी दर 3.36% से घटकर 1.58% पर आ गई है, जबकि हेपेटाइटिस सी (एचसीवी) की दर 0.14% से बढ़कर 0.64% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है.
जांच और इलाज की प्रक्रिया में कोई विलंब न हो- अभियान निदेशक
एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने रोकथाम और जागरूकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बचाव ही एकमात्र इलाज है, इसलिए हमें प्रिवेंशन की ओर मजबूती से कदम बढ़ाने होंगे. उन्होंने समाज में हेपेटाइटिस को लेकर जागरूकता की कमी को एक प्रमुख चुनौती बताया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निचले स्तर तक मरीजों की पहचान करने तथा उन्हें तुरंत इलाज से जोड़ने के लिए एक प्रभावी एक्शन प्लान तैयार किया जाए.इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, क्षेत्रीय अस्पतालों और जांच प्रयोगशालाओं के बीच बेहतर तालमेल बैठाने पर जोर दिया ताकि जांच और इलाज की प्रक्रिया में कोई विलंब न हो. विशेषज्ञों की कमी और बीमारी की जटिलता को देखते हुए त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता जताई और छोटे जिलों से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हेपेटाइटिस उन्मूलन के लिए सभी आवश्यक जांच अभियान शुरू करने का सुझाव दिया.
राज्य महामारी विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार कर्ण ने राज्य में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति और 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन पर अपनी प्रस्तुति दी. कार्यक्रम में हेपेटाइटिस सी से पूरी तरह स्वस्थ हो चुके मरीजों को प्रमाण पत्र सौंपे गए तथा समाज में जागरूकता फैलाने वाले पीयर सपोर्टर्स को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया.
तकनीकी सत्र में रिम्स रांची के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने वायरल हेपेटाइटिस बी व सी की लैब जांच एवं वायरल लोड टेस्टिंग की चुनौतियाँ विषय पर व्याख्यान दिया. इसके बाद हेपेटाइटिस बी एवं सी के उपचार विषय पर रिम्स के मेडिसिन विभाग से डॉ. अजीत डुंगडुंग, डॉ. सिद्धार्थ कपूर (सहायक प्रोफेसर) तथा डॉ. रश्मि सिन्हा ने विस्तृत जानकारी साझा की.





