ghatshilaAugust 21, 2026
चाकुलिया सीएचसी में प्रसव के दौरान नवजात की मौत, परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर किया हंगामा
चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार सुबह प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत हो गई।
By Newsroom
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। वहीं, सीएचसी में आपात स्थिति में सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार सुबह प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद मृत नवजात के परिजन आक्रोशित हो गए और स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया।
घटना की जानकारी मिलने पर प्रखंड प्रमुख धनंजय करुणामय अपने समर्थकों के साथ सीएचसी पहुंचे और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रंजीत मुर्मू से पूरे मामले की जानकारी ली। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा प्रसव कक्ष में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को फटकार लगाने और मामले की स्थिति स्पष्ट करने के बाद परिजन शांत हुए।
सुबह 7 बजे सीएचसी में कराया गया था भर्ती
जानकारी के अनुसार, बेंद पंचायत के कदमाशोली निवासी शंभू महतो की पत्नी शताब्दी महतो, उम्र 26 वर्ष, को शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद सहिया की मदद से ममता वाहन के जरिए उन्हें सुबह करीब 7 बजे चाकुलिया सीएचसी में भर्ती कराया गया।
बताया गया कि सुबह करीब 9 से 9:30 बजे के बीच प्रसव के दौरान बच्चे के शरीर से पहले गर्भनाल बाहर आ गई और बाद में वह गर्भ में ही बच्चे के गले में लिपट गई। इसके कारण नवजात की मौत होने की बात बताई जा रही है। घटना के समय प्रसव कक्ष में स्वास्थ्यकर्मी अनिमा महतो और भक्ति महतो ड्यूटी पर तैनात थीं।
दो साल में दूसरी बार बेटे को खोया
शताब्दी महतो की पांच वर्ष की एक बेटी है। परिजनों के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले उन्होंने इसी अस्पताल में एक पुत्र को जन्म दिया था। बाद में बच्चे की किडनी में खराबी के कारण इलाज के दौरान कोलकाता में उसकी मौत हो गई थी। अब दोबारा नवजात पुत्र की मौत होने से मां का रो-रोकर बुरा हाल है और परिवार में मातम पसरा हुआ है।
सीएचसी में नहीं है सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा
चाकुलिया सीएचसी में हर महीने करीब 200 से 250 प्रसव होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद आपात स्थिति में सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में स्थायी महिला चिकित्सक और महिला सर्जन की भी व्यवस्था नहीं है।
ऐसी स्थिति में प्रसव के दौरान जटिलता आने पर मरीजों को झाड़ग्राम रेफर किया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सीएचसी में आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन की समुचित व्यवस्था होती, तो शायद नवजात की जान बचाने का प्रयास किया जा सकता था।
फिलहाल, परिजनों की ओर से लगाए गए लापरवाही के आरोप और नवजात की मौत के वास्तविक कारण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।


