ranchiAugust 11, 2026
संथाली भाषा की प्राथमिक स्तर से ओलचिकी लिपि में पढ़ाई सुनिश्चित करने की मांग
तीनों विधायक नहीं जापानी सॉन्ग
By Newsroom

घाटशिला के विधायक सोमेश चन्द्र सोरेन, बहरागोड़ा के विधायक समीर कुमार महंती एवं पोटका के विधायक संजीव सरदार ने मंगलवार को रांची स्थित झारखंड विधानसभा के मुख्यमंत्री कक्ष में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान विधायकों ने संथाली भाषा एवं ओलचिकी लिपि के संरक्षण, संवर्धन तथा प्राथमिक स्तर से ही ओलचिकी लिपि में संथाली भाषा की पढ़ाई सुनिश्चित करने को लेकर मुख्यमंत्री को मांग-पत्र सौंपा।
विधायकों ने कहा कि संथाली भाषा झारखंड की समृद्ध भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संथाली भाषा को झारखंड में द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है और यह भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल है। संथाली भाषा की अपनी स्वतंत्र एवं विशिष्ट लिपि ‘ओलचिकी’ है।
विधायकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में राज्य के विभिन्न विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में संथाली भाषा की पढ़ाई मुख्यतः माध्यमिक स्तर से संचालित होती है, जबकि प्राथमिक स्तर पर इसकी पढ़ाई नगण्य है। इसके कारण बच्चों को अपनी मातृभाषा में प्रारंभिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने मांग की कि राज्य के विद्यालयों एवं संबंधित शिक्षण संस्थानों में प्राथमिक स्तर से ही ओलचिकी लिपि में संथाली भाषा की पढ़ाई प्रभावी एवं अनिवार्य रूप से संचालित कराई जाए। इसके लिए पर्याप्त संख्या में पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति तथा आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विधायकों ने कहा कि संथाली भाषा एवं ओलचिकी लिपि के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्राथमिक स्तर से उच्च स्तर तक व्यवस्थित शिक्षा व्यवस्था आवश्यक है। मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने से संथाली भाषा के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
विधायकों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्राथमिक स्तर से ओलचिकी लिपि में संथाली भाषा की पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए संबंधित विभागों को समुचित कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।




