Wednesday, September 2, 2026
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ghatshilaAugust 11, 2026

बांग्ला एकेडमी के गठन की मांग, शिक्षा मंत्री के बयान पर बंगाली समुदाय में नाराजगी

प्रेस कॉन्फ्रेंस

By Newsroom

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घाटशिला। दाहीगोंडा स्थित गौरीकुंज परिसर में गौरीकुंज उन्नयन समिति की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। समिति के अध्यक्ष तापस चटर्जी ने झारखंड में बांग्ला भाषा के संरक्षण, संवर्धन और बांग्ला एकेडमी के गठन की मांग को लेकर सरकार से पहल करने की अपील की। तापस चटर्जी ने कहा कि पिछले दिनों झारखंड विधानसभा में विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, विधायक समीर महंती, विधायक प्रदीप यादव और विधायक उदय शंकर सिंह ने बांग्ला एकेडमी के गठन तथा बांग्ला भाषा के विकास को लेकर आवाज उठाई थी। उन्होंने इसके लिए सभी विधायकों को बंगाली समुदाय की ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री सुदीप्तो कुमार सोनू द्वारा बांग्ला एकेडमी के गठन से इनकार किया जाना झारखंड में रहने वाले लाखों बंगाली समुदाय के लोगों के लिए निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि बंगाली समुदाय मंत्री के इस बयान की निंदा करता है। तापस चटर्जी ने कहा कि इस वर्ष झारखंड में करीब साढ़े चार हजार बच्चों ने मैट्रिक और लगभग 1500 बच्चों ने प्लस टू की परीक्षा दी है। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य के समय विद्यालयों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई होती थी, जिससे बंगाली समुदाय के बच्चे अपनी मातृभाषा की शिक्षा प्राप्त करते थे। लेकिन झारखंड अलग राज्य बनने के बाद धीरे-धीरे बांग्ला भाषा की पढ़ाई विद्यालयों से समाप्त होती चली गई। उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा की पढ़ाई प्रभावित होने से बंगाली समुदाय की भाषा और संस्कृति पर भी असर पड़ रहा है। समुदाय अपने स्तर पर स्कूल संचालित कर भाषा और संस्कृति को बचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द बांग्ला एकेडमी का गठन करने तथा विद्यालयों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई और आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो बंगाली समुदाय आने वाले दिनों में आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। वहीं, केंद्रीय उपाध्यक्ष साधु चरण पाल ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद बांग्ला भाषा की किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं और कई विद्यालयों में पढ़ाई भी बंद हो गई। इससे बंगाली समुदाय के बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के साथ-साथ संस्कृति के संरक्षण के लिए भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है। प्रेस वार्ता में सचिव शिल्पी सरकार, संजय सिन्हा, कांतो लाल दास, साधना पाल, सोमा सरकार, शिखा रक्षित सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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